Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi: भगवान श्री हरि जिसे विष्णु के नाम से भी जाना जाता है, वही परमात्मा निराकार परब्रह्मा है, जो कि इस संसार के पालन करता है। श्री हरि भक्तों के लिए दयामय है। लेकिन शत्रुओं के लिए अत्यंत भयंकर है। श्री हरि स्तोत्रं पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर धूम मचा रहा है और लोगों को यह स्तोत्रं बहुत ही पसंद आ रहा है। हर दिन इस मंत्र का पाठ करने से मन को अत्यंत शांति मिलती है और हर समय खुशी महसूस होती है।

Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi

Shri Hari Stotram Lyrics in Hindi

जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं
शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं
नभोनीलकायं दुरावारमायं
सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं ॥1

सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं
जगत्सन्निवासं शतादित्यभासं
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं
हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ॥2

रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं
जलान्तर्विहारं धराभारहारं
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं
ध्रुतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ॥3

जराजन्महीनं परानन्दपीनं
समाधानलीनं सदैवानवीनं
जगज्जन्महेतुं सुरानीककेतुं
त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ॥4

कृताम्नायगानं खगाधीशयानं
विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानं
स्वभक्तानुकूलं जगद्व्रुक्षमूलं
निरस्तार्तशूलं भजेऽहं भजेऽहं ॥5

समस्तामरेशं द्विरेफाभकेशं
जगद्विम्बलेशं ह्रुदाकाशदेशं
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहं
सुवैकुण्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ॥6

सुरालिबलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं
गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठं
सदा युद्धधीरं महावीरवीरं
महाम्भोधितीरं भजेऽहं भजेऽहं ॥7

रमावामभागं तलानग्रनागं
कृताधीनयागं गतारागरागं
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं
गुणौधैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ॥8

फलश्रुति

इदं यस्तु नित्यं समाधाय चित्तं
पठेदष्टकं कण्ठहारम् मुरारे:
स विष्णोर्विशोकं ध्रुवं याति लोकं
जराजन्मशोकं पुनर्विन्दते नो ॥

श्री हरि स्तोत्रं का अर्थ

जो समस्त जगत के रक्षक, जिनके गले में चमकता हार है और शरद ऋतु में चमकते चंद्रमा की तरह जिनका मस्तक है और जो राक्षसों के भी काल है, जिनका रंग आकाश की तरह नीला है और जो अजय मायावी शक्तियों के स्वामी, जिनकी पत्नी लक्ष्मी है, उनको मैं बारंबार पूजता हूं।

समुद्र में वास करने वाले, जिनके मुस्कुराहट खिले हुए पुष्प की तरह, जो पूरे दुनिया में है, 100 सूर्य के बराबर जिनकी उपस्थिति हो और शस्त्र, चक्र और गदा धारण किए हुए पीले वस्त्रों में सुशोभित जिनकी सुंदर से चेहरे पर प्यारी मुस्कान हो, उस भगवान श्री हरि को मैं पूजता हूं।

जिनके गले के हार में मां लक्ष्मी का चिन्ह हो, जो वेद वाणी का सार हो और जल में विहार करने वाले, पृथ्वी के भार को धारण करने वाले, जिनका रूप सदा आनंद में रहता है और हमारे मन को आकर्षित करने वाले, जिन्होंने अनेकों रूप धारण किए हुए, उस भगवान विष्णु को मैं बारंबार पूजाता हूं।

जो परमानंद से भरे हुए और जन्म और उम्र से मुक्त हो, जिनका मन सदैव शांत और स्थिर रहता हो और बार-बार देखने पर भी जो हमेशा नवीन प्रतीत होते हैं, जो इस जगत के जन्म के कारक है और सभी देवताओं के सेना के रक्षक, तीनों लोकों के बीच सेतु है उस भगवान श्री हरि को मैं बारंबार पूजता हूं।

जो पक्षियों के राजा गरुड़ की सवारी करते हैं, जिन्होंने वेद गाया है, जो कि शत्रुओं का मान हरते हैं और मुक्ति प्रदान करने वाले और अपने भक्तों की प्रिय, जो इस जगत के वृक्ष की जड़ है, सभी दुखों को नष्ट करने वाले उस भगवान श्री हरि को मैं पूजता हूं।

काली मधुमक्खी के समान जिनके बालों का रंग हो, जो सभी देवताओं के स्वामी है, पृथ्वी जिनके शरीर का हिस्सा है और जिनका शरीर आकाश के समान स्पष्ट है, जो सभी संसारों के बंधनों से मुक्त है और जिनका शरीर सदा दिव्य रहता है, बैकुंठ जिनका निवास है, उस प्रभु श्रीहरि को में बारंबार पूजता हूं।

जो तीनों लोगों में सर्वश्रेष्ठ है और देवताओं में भी सर्वशक्तिमान है, जिनका एक ही स्वरूप है, जो युद्ध में सदा वीर है और महावीरों में भी वीर है और सागर के किनारे वास करने वाले उस प्रभु श्री हरि को मैं बारंबार पूजता हूं।

नग्र नाग पर विराजित जिनके बाय भाग में लक्ष्मी विराजित है और जो यज्ञों से प्राप्त किए जा सकते हैं और राग रंग से मुक्त और सभी ऋषि मुनि जिनके गीत गाते हैं, जो सभी गुणों से परे हैं और सभी देवता गण जिन की सेवा करते हैं, उस भगवान विष्णु को मैं बारंबार पूजता हूं।

मुरारी के कंठ की माला के समान भगवान हरी का यह अष्टक जो भी इसे सच्चे मन से पड़ता है, उसे वैकुंठ लोक प्राप्त होता है और इसमें कोई भी संदेह नहीं है कि वह दुख, शोक, जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होता है।

Shri Hari Stotram Lyrics in English

Jagajjalapalam Kachad Kanda Malam,
Sarahandraphalam Mahadaithyakalam,
Nabho Neelakayam Duravaramayam,
Supadmasahayam Bajeham Bajeham.

Sadambhodhi Vasam Galathpushpahasam,
Jagatsannivasam Sathadhithyabhasam,
Gadhachakra Sastram Lasad Peetha Vasthram,
Hasacharu Vakthram Bajeham Bajeham.

Ramakantaharam Sruthivrathasaram,
Jalantharviharam Dharabharaharam,
Chidanandaroopam Manogna Swaroopam,
Druthaneka Roopam Bajeham Bajeham.

Jarajanma Heenam Parananda Peetham,
Samadana Leenam Sadaivanaveetham,
Jagajjanma Hethum Suraneeka Kethum,
Trilokaika Sethum Bajeham Bajeham.

Kruthamnayaganam Khagadhisayanam,
Vimukthernidhanam Hararadhimanam,
Swabakthanukoolam Jagadvrukshamoolam,
Nirastharthasoolam Bajeham Bajeham.

Samasthamaresam Dwirephabha Klesam,
Jagat Bimba Lesam Hrudakasa Desam,
Sada Divya Deham Vimukthakhileham,
Suvaikuntageham Bajeham Bajeham.

Suralibalishtam Trilokivarishtam,
Gurannangarishtam Swaroopaikanishtam,
Sadyudhadheeram Mahaveeraveeram,
Bhambhoditheeram Bajeham Bajeham.

Ramavamabhagam Thalanagna Nagam,
Kruthadeethayagam Gatharagaragam,
Muneendrai Sugeetham Surai Sapareeham,
Ganougairaathetham Bajeham Bajeham.

आजकल बहुत सारे सोशल मीडिया के वीडियोस पर यह गाना सुनने को मिलता है और बहुत ही सुंदर श्री विष्णु जी का स्तोत्रं है। इसको सुनते ही मन तुरंत प्रसन्न होता है और अचानक एक शांति महसूस होने लगती है।

आशा करता हूं कि आप इस स्तोत्रं को सच्चे मन से पड़ेंगे और इस संसार के जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाएंगे। यहां पर हमने श्री हरि स्तोत्रं के यूट्यूब वीडियो का भी लिंक साझा किया है, जिसे आप जरूर सुने।

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